सोमवार, 19 अप्रैल 2021

Apne faislon par bharosa rakhein

 अपने फैसलों पर भरोसा रखें

सुरेश और उसके पिताजी शहर से एक गधा खरीद कर अपने गाँव जा रहे थे। रास्ते में एक गाँव में आराम करने के लिए, वे थोड़ी देर के लिए रुक गये। जब वे वहाँ से चलने लगे, तो गाँव के कुछ लोगों ने उन्हें सलाह दी।
Ramesh Suresh or Gadhe ki Kahani

'आप ऐसा क्यों नहीं करते कि आपमें से एक आदमी गधे पर बैठकर यात्रा करे और दूसरा पैदल चले" पिताजी ने सुरेश से कहा "बेटा बात तो यह ठीक कह रहे हैं, एक काम कर तू गधे पर बैठ जा, मैं पैदल चलता हूँ सुरेश ने कहा"ठीक है पिताजी।"

चलते-चलते वह अगले गाँव पहुंचे, वहाँ पर कुछ लोगों ने उन्हें देखा तो वे बोले " देखो कितना नालायक बच्चा है, खुद गधे पर चढ़ा बैठा है और बाप को पैदल चला रहा है। जब सुरेश ने यह बात सुनी, तो उसने अपने पिता को गधे पर बैठा दिया और खुद पैदल चलने लगा। 

जब वह अगले गाँव पहुंचे, तो वहां भी कुछ लोग खड़े थे। उनको देखकर गाँव वाले बोलने लगे "देखो कैसा निर्दयी बाप है कि छोटे से बच्चे को पैदल चला रहा है और खुद गधे पर चढ़ा बैठा है। जब पिता ने यह बात सुनी, तो उसने सुरेश से कहा " बेटा तू भी गधे पर बैठ जा।" चलते-चलते वह अगले गाँव पहुंचे, वहाँ भी कुछ लोगों ने, उन पर टिप्पणी की कि"देखो दो-दो लोग एक निर्बल जानवर पर चढे बैठे हैं।"
पिता ने अपने पुत्र से कहा कि बेटा, अब तो सिर्फ एक ही तरीक़ा बचा है, जा जाकर एक बड़ा-सा डंडा ले आ। बेटा दौड़कर एक डण्डा ले आया। सुरेश के पिता ने डंडे पर गधे को उल्टा करके बांध दिया और डण्डे को अपने कन्धों पर रखकर दोनों गधे को उठाकर चल दिये । वे एक नदी की पुलिया से गुजर रहे थे। वहां से गुजर रहे दूसरे मुसाफिरों ने जब उन्हें देखा तो वो सब ज़ोर-ज़ोर से हंसने लगे और बोले "आज तक गधे को इन्सान को ढोते देखा था, आज इन्सान को गधे को ढोते भी देख लिया। उनकी जोर की हंसी की आवाज़ से गधा बिदक गया और डण्डे सहित नदी में गिर कर डूब गया।
सन्देश - हमें अपने फैसलों पर भरोसा होना चाहिए। हम सभी लोगों को सन्तुष्ट नहीं कर सकते हैं।
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